Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नींद आना à¤à¥€ है चिंता का विषय, जानें इसे à¤à¤—ाने के कà¥à¤› सà¥à¤ªà¤° इफेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤µ तरीके
जब आप जरूरत से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सोती हैं, तो इससे न केवल आपका डेली रà¥à¤Ÿà¥€à¤¨ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होता है, बलà¥à¤•ि और à¤à¥€ कई सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकती हैं। इसलिठइसे कंटà¥à¤°à¥‹à¤² करना जरूरी है।
अचà¥à¤›à¥€ सेहत के लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में नींद लेना बेहद जरूरी होती है, लेकिन जब यही नींद अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• मातà¥à¤°à¤¾ में वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ लेने लगे तो यह बीमारी की वजह बन सकती है। सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ शरीर और दिमाग के लिठहर दिन 7 से 8 घंटे की नींद लेना परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ माना जाता है। वहीं, कà¥à¤› लोग à¤à¤¸à¥‡ हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हर समय नींद आती रहती है। इससे न सिरà¥à¤« उनके अगले दिन की कारà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ बà¥à¤°à¥€ तरह से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होती है, बलà¥à¤•ि सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ पर à¤à¥€ इसका काफी बà¥à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ सकता है। इसलिठजरूरी है कि इसे समय रहते कंटà¥à¤°à¥‹à¤² किया जाà¤à¥¤ यहां जानिठजà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नींद को कंटà¥à¤°à¥‹à¤² करने के कà¥à¤› सà¥à¤ªà¤°à¤‡ फेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤µ (how to stop oversleeping) टिपà¥à¤¸à¥¤
सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ शरीर को कितनी नींद की जरूरत होती है?
उमà¥à¤° के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• हर किसी की नींद की जरूरत अलग होती है। नेशनल सà¥à¤²à¥€à¤ª फाउंडेशन के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, किस उमà¥à¤° के हिसाब से किसे कितनी नींद की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है।
उमà¥à¤° आवशà¥à¤¯à¤• नींद
0-3 महीने 14 से17 घंटे
4-11 महीने 12 से 15 घंटे
1-2 साल 11 से 14 घंटे
3-5 साल 10 से 13 घंटे
6-13 साल 9 से 11 घंटे
14-17 साल 8 से 10 घंटे
18-64 साल 7 से 9 घंटे
65 साल से अधिक 7 से 8 घंटे
कà¥à¤¯à¤¾ हो सकती हैं अधिक नींद आने की वजह
रात के वक़à¥à¤¤ परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नींद न लेना: नाइट शिफà¥à¤Ÿ में काम करना, देर रात तक टीवी देखना या पढ़ना आदि की वजह से हाइपरसोमनिया यानी अधिक नींद की परेशानी हो सकती है।
मौसम की वजह से: सरà¥à¤¦à¥€ के मौसम में ठंड लगने की वजह से रात को नींद बार-बार टूट सकती है। इसी तरह गरà¥à¤®à¥€ के मौसम में à¤à¥€ हो सकता है। रात को सोते वक़à¥à¤¤ गहरी नींद न आने की वजह से दिन में नींद आने की परेशानी हो सकती है।
चिंता या तनाव: कà¥à¤› लोगों को तनाव की वजह से रात को ठीक से नींद नहीं आती है। इस कारण से दिन के वक़à¥à¤¤ अधिक नींद आने की परेशानी हो सकती है। बता दें कि सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ नींद के लिठरात की नींद बेहद आवशà¥à¤¯à¤• है।
दवाओं का सेवन: à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ व नींद की दवा लेने से सà¥à¤²à¥€à¤ª पैटरà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकता है। दवाओं का सेवन à¤à¥€ नींद अधिक आने की à¤à¤• वजह हो सकती है।
अलà¥à¤•ोहल का सेवन: अधिक नींद आने की à¤à¤• वजह शराब का सेवन à¤à¥€ हो सकता है।
कैफीन यà¥à¤•à¥à¤¤ डà¥à¤°à¤¿à¤‚कà¥à¤¸: जो लोग चाय या कॉफी का सेवन करते हैं उनकी सà¥à¤²à¥€à¤ª साइकिल पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकती है। इससे à¤à¥€ अधिक नींद आने की परेशानी हो सकती है।
किसी गंà¤à¥€à¤° बीमारी का होना: नॉकटरà¥à¤¨à¤² असà¥à¤¥à¤®à¤¾, हाइपोथायराइड, à¤à¤¸à¥‹à¤«à¥‡à¤—ल रिफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸ आदि हाइपरसोमनिया की वजह हो सकते हैं।
सà¥à¤²à¥€à¤ª डिसऑरà¥à¤¡à¤°: रेसà¥à¤Ÿà¤²à¥‡à¤¸ लेग सिंडà¥à¤°à¥‹à¤®, सà¥à¤²à¥€à¤ª à¤à¤ªà¤¨à¤¿à¤¯à¤¾, नींद में चलना, तनाव आदि नींद को खराब करने के साथ इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ की वजह बन सकते हैं।
अधिक नींद आने के à¤à¥€ हैं कà¥à¤› अलग पà¥à¤°à¤•ार
1. नैरोकोलेपà¥à¤¸à¥€ टाइप-1: नारà¥à¤•ोलेपà¥à¤¸à¥€ टाइप-1 à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का सà¥à¤²à¥€à¤ª डिसऑरà¥à¤¡à¤° हैं, जो नींद के पैटरà¥à¤¨ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। इससे पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को पूरी रात परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नींद लेने के बाद à¤à¥€ दिन में अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• नींद आने की परेशानी हो सकती है। यह समसà¥à¤¯à¤¾ मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में मौजूद हाइपोथैलेमिक हाइपोकैटà¥à¤°à¤¿à¤¨ नà¥à¤¯à¥‚रॉनà¥à¤¸ के कम होने की वजह से और कैटापà¥à¤²à¥‡à¤•à¥à¤¸à¥€ के कारण हो सकती है।
2. नैरोकोलेपà¥à¤¸à¥€ टाइप-2: यह à¤à¥€ हाइपरसोमनिया का ही à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार है, जो आमतौर पर किशोरों में देखने को मिलता है। नैरोकोलेपà¥à¤¸à¥€ टाइप-1 की तरह इसमें à¤à¥€ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ हर वक़à¥à¤¤ नींद आने की शिकायत से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ हो सकता है। बस इसमें कैटापà¥à¤²à¥ˆà¤•à¥à¤¸à¥€ की परेशानी नहीं होती है। इसी वजह से इसे नैरोकोलेपà¥à¤¸à¥€ टाइप-1 का पहला चरण à¤à¥€ माना जा सकता है। इससे गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ लोग दिन के वक़à¥à¤¤ में कà¥à¤› देर की नींद लेकर खà¥à¤¦ को तरो ताजा महसूस कर सकते हैं।
3. आइडियोपैथिक हाइपरसोमनिया: आइडियोपैथिक हाइपरसोमनिया से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ लोगों को à¤à¥€ रात में परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नींद लेने के बावजूद दिन à¤à¤° नींद आती है। इसमें वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का अपनी सà¥à¤²à¥€à¤ª साइकिल पर बिलकà¥à¤² à¤à¥€ कंटà¥à¤°à¥‹à¤² नहीं रहता है। नैरोकोलेपà¥à¤¸à¥€ से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ लोगों की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में इससे पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ दिन में सोने के बावजूद à¤à¥€ तरोताजा महसूस नहीं कर पाते हैं।
4. कà¥à¤²à¥‡à¤¨-लेविन सिंडà¥à¤°à¥‹à¤®: यह à¤à¥€ हाइपरसोमनिया का à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार है, जो दà¥à¤°à¥à¤²à¤ है। मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से यह रोग किशोर पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है। इससे पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ लगातार 20 घंटों तक à¤à¥€ सो सकते हैं, जो सिरà¥à¤« à¤à¥‹à¤œà¤¨ करने के लिठजागते हैं और फिर से सो जाते हैं। यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ कà¥à¤› हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ या महीनों तक परेशान कर सकती है। इसके पीछे संजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤•, वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• और मानसिक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ गड़बड़ी को मà¥à¤–à¥à¤¯ वजह माना जा सकता है।
जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ नींद को à¤à¤—ाने के कà¥à¤› सà¥à¤ªà¤° इफेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤µ तरीके
1. कॉफी: नींद à¤à¤—ाने के लिठकॉफी à¤à¤• बेहतर विकलà¥à¤ª हो सकता है। NCBI (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर मौजूद à¤à¤• रिसरà¥à¤š के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, कॉफी में कैफीन की मातà¥à¤°à¤¾ पाई जाती है। कैफीन का सेवन सीधे मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ पर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ डालता है। यह दिमाग और तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ की à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€ बढ़ाने के लिठजाना जाता है। यह रिफà¥à¤°à¥‡à¤¶ करने के साथ नींद को दूर करने में मदद कर सकता है।
2. पानी: रिसरà¥à¤š के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, पानी कम पीने से शरीर में थकान और किसी काम में धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने में परेशानी होने के साथ हर वक़à¥à¤¤ नींद आने की परेशानी हो सकती है। à¤à¤¸à¥‡ में दिनà¤à¤° में परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ पानी पीना लाà¤à¤•ारी साबित हो सकता है।
3. à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ: हाइपरसोमनिया की à¤à¤• वजह मोटापा है। à¤à¤¸à¥‡ में हाइपरसोमनिया से पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ आधे से à¤à¤• घंटे तक किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार की à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ कर सकते हैं। इससे वजन को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ रखने के साथ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ तरोताजा à¤à¥€ महसूस कर सकता है।
4. शॉवर: जब शरीर में थकान महसूस होती है, तो नींद आने लगती है। à¤à¤¸à¥‡ में शॉवर लेना फायदेमंद हो सकता है। नहाने से मूड रिफà¥à¤°à¥‡à¤¶ होता है, जो नींद को à¤à¤—ाने में मददगार हो सकता है। इस पà¥à¤°à¤•ार शॉवर लेने से बहà¥à¤¤ अधिक नींद आने के कारण होने वाली थकान से कà¥à¤› हद तक राहत मिल सकती है।
5. à¤à¤ªà¤•ी लेना: नींद आने पर à¤à¤• छोटी सी à¤à¤ªà¤•ी लेना à¤à¥€ नींद से दूर रखने में सहायक हो सकता है। असल में, à¤à¤• छोटी à¤à¤ªà¤•ी सà¥à¤¸à¥à¤¤à¥€ और उनींदापन को दूर करने के साथ नींद को दूर करने में मददगार हो सकती है। रिसरà¥à¤š की माने तो à¤à¤• छोटी à¤à¤ªà¤•ी मेमोरी को तेज करने के साथ बेहतर कारà¥à¤¯ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ जैसे फायदे पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ कर सकती है।
| --------------------------- | --------------------------- |